रविवार पन्ना 14 जून 2026, इंदौर के ललए तो “कश्मीर ्ें आ् सैलानमीकश्मीरमी से कभमी लकन कोई परेशानमी नहीं है, ले ल ले लेते हैं और लिर भमी सेना के सैलनक ्ोबाइ के युवकों को सभमी वापस भमी नहीं करते। जम्मू छूट है, आ् कश्मीरमी को नहीं।” रंग-हजार रवििार. 14 जून....
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रविवार पन्ना 14 जून 2026, इंदौर के ललए तो “कश्मीर ्ें आ् सैलानमीकश्मीरमी से कभमी लकन कोई परेशानमी नहीं है, ले ल ले लेते हैं और लिर भमी सेना के सैलनक ्ोबाइ के युवकों को सभमी वापस भमी नहीं करते। जम्मू छूट है, आ् कश्मीरमी को नहीं।” रंग-हजार रवििार. 14 जून. 2026 'कश्मीर-फाइल' श्रीनगर हवाई अड्डे पर थरी। बाहर आते हरी अपनापन हुआ। जैसे पुराने इंदौर के हवाई पहुच अड्डे पर हों। तेज रोशनी, तड़क-भड़क महसूस का कोई डर, न सोनमग्त के, बफफीले जहां ट्रेंड ड्ाइवर की रासते, जोहजलापास जीरो पहाड़ों की ऊंचाई वाला बफफीले बसूरत गाहड़यां चलती हैं। खू ान, पहाड़ों पाइंट। बफ्फ से भरे मैद रासता, पड़ जाए। नज़ारा हक दो आंखें कम ककूवत तक जहां ं कर न खो जाने से हपघलते बफ्फ। ऐसा से दूर छोटा सा हवाई अड्ा। धारी महहला ने इशारे से रासता हदखाया। ाती प्कृहत हजसे पाने की ही कोई अफरा- तफरी। अबायाथी। सूटकेस पहहयों पर चलाते हुए चाय लबालब खूबसूरती लुट बौनापन। गुलमग्त, पहलगाम, पीर हलकी सी ठंडी बयार बह रही था, उसने कहा इंसान के पास नहीं, हकतना और वेरीनाग में फैली अपार रुपए देने थे, सौ का नोट पहाड़ की गली जैसी जोशीले झेलम जैसी नहदयां इतनी साफ
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