रविवार रंग-हजारपन्ना SUNDAY 30 रवििार. 30 अगस्त. 2026 "आज फिर जीने की तमन्ना है...!' माओवादी कवद्रोकहयों ्से मुलाकात, एडवड्ड स्ोड़ेन और बातचीत जै्से अलग-अलग कवषयों पर कलखा है। मेरे ले अकभनेता जॉन कु्सैक ्से खन को लेकर हमेशा बहुत अगस्त 2026, इंदौर q वन्या...
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रविवार रंग-हजारपन्ना SUNDAY 30 रवििार. 30 अगस्त. 2026 "आज फिर जीने की तमन्ना है...!' माओवादी कवद्रोकहयों ्से मुलाकात, एडवड्ड स्ोड़ेन और बातचीत जै्से अलग-अलग कवषयों पर कलखा है। मेरे ले अकभनेता जॉन कु्सैक ्से खन को लेकर हमेशा बहुत अगस्त 2026, इंदौर q वन्या जैन , तो मेरे आलोचक लगातार तीखे ररएकशन आए। कुछ लोग मुझे बेहद प्संद करते हैं रे काय्चक्रमों में हंगामा हुआ, हैं िो बार-बार आज के मुझ पर कनशाना ्साधते रहे हैं। मेरे पुतले जलाए गए, मे लेखक, एक्टिविसटि अरुंधवि रॉय जब बाि करिी मुझे देश-कवरोधी कहा गया, पाककसतान चले जाने की बात कही गई। मुझ पर देशद्रोह को बयां करने वाली है और जमाने पर आती हैं। उनकी ककताब तो खैर बीते वकत और अदालत की अवमानना जै्से मामले भी लगाए गए। लेककन इ्सके बावजूद मैंने होते हैं जब उनकी मौजूदा मां का बखान (या…!) भी है। हमारे कान अक्सर तब खड़े हूं। उन मुद्ों पर कलखना बंद नहीं ककया, कजनहें मैं जरूरी मानती इं्सान की तरर धयान दोलन पर कहती हैं, बच्ों ने दौर पर राय बनाती हैं। बातों ही बातों में जंतर-मंतर आं मेरे कलए लेखन का बडा कहस्सा उ्सी दू्सरे कमरे में मौजू द ्समय में बनी इमेज क
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