रविवार पन्ना SUNDAY 16 अगस्त 2026, इंदौर अनाज, एमस, आईआईटी, कंप्ूटर और चांद... यह भी आजादी िी िहानी आजादी का वहसाब करते समय अगर हम वसफ्क यह वगनाएं वक देश में कया नहीं हुआ तो तसिीर भी अिूरी होगी और इवतहास के साथ बेईमानी भी। 1947 में भारत के सामने वसफ्क गरीबी...
More
रविवार पन्ना SUNDAY 16 अगस्त 2026, इंदौर अनाज, एमस, आईआईटी, कंप्ूटर और चांद... यह भी आजादी िी िहानी आजादी का वहसाब करते समय अगर हम वसफ्क यह वगनाएं वक देश में कया नहीं हुआ तो तसिीर भी अिूरी होगी और इवतहास के साथ बेईमानी भी। 1947 में भारत के सामने वसफ्क गरीबी नहीं थी। अनाज कम था, अचछे असपताल वगने-चुने थे, बडे तकनीकी संसथान नहीं थे, उदोग कमजोर था और नई दुवनया की दौड में भारत बहुत पीछे से चला था। भूिे देश ने पहले अपना पेट भरना सीिा 1960 के दशक तक भारत के दलए अनाज बहुत बड़ी दचंता था। दफर हररत कांदत आई। बेहतर बीज, दसंचाई, खाद, खेती के नए तरीके और दकसानों की मेहनत ने तसवीर बदलनी शुरू की। िीरे-िीरे वह देश जो अनाज की कमी से परेशान रहता था अपने पैरों पर खड़ा हो गया। जे ल की जमीन से ननकला आईआईटी पहले ही ललख लदया था आजादी का वादा! हम आम तौर पर आजादी की कहानी 15 अगसत 1947 से शुरू करते हैं। मगर असली कहानी इससे पहले शुरू हो चुकी थी। ससर्फ अंगेजों को देश से बाहर करने का नहीं था। सवाल यह भी था सक अंगेज चले जाएंगे तो मजदूर को ढंग की कमाई, काम के घंटे, बीमारी, बुढापे और सजा भी खतम होनी चादहए। 95 साल पुराना
Less