रविवार पन्ना SUNDAY 5 जुलाई 2026, इंदौर मुंबई को समझने की कोविि लोगों ने की है। वकसी ने सपनों का िहर कहा, वकसी ने संघर्ष का… तो वकसी ने कभी न रुकने िाला िहर बताया। विलमी गीतकार-वनर्देिक (91) गुलजार जब मुंबई की बात करते हैं, तो उनके िबर्ों में वसि्फ िहर...
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रविवार पन्ना SUNDAY 5 जुलाई 2026, इंदौर मुंबई को समझने की कोविि लोगों ने की है। वकसी ने सपनों का िहर कहा, वकसी ने संघर्ष का… तो वकसी ने कभी न रुकने िाला िहर बताया। विलमी गीतकार-वनर्देिक (91) गुलजार जब मुंबई की बात करते हैं, तो उनके िबर्ों में वसि्फ िहर नहीं, बललक सात र्िक का अनुभि बोलता है। गुलजार कहते हैं दक उनहोंने मुंबई के कम से कम िो बड़े चेहरे िेखे हैं। मुंबई जब 1950 में पहुंचे थे और मुंबई- जो आज है। कहानी दसर्फ शहर के बिलने की नहीं है। मुंबई बिली है, लेदकन वे खुि भी तो बिल गए हैं। उनहें आज भी वह पुराना बॉमबे याि है। कपड़ा दमलों की दचमदनयों से उठता धुआं, मजिूरों की आवाजाही, रैल्रियों की रौनक और मेहनतकश की िुदनया। औद्ोदगक शहर था, दजसकी पहचान िेशभर में कपड़ा दमलों से थी। उनहें वे बसें भी याि हैं दजनमें खड़े होने की इजाजत नहीं थी। सबसे जयािा याि है, उस िौर के मजिूरों का आतमसममान। उस समय मजिूर गरीब जरूर थे, मगर उनकी गरीबी में भी गररमा थी। रिेि यूदनयन नेता श्ीपाि अमृत िांगे के साथ दनकलने वाले जुलूस ताजा हैं। प्रगदतशील लेखक संघ की बैठक भी दजंिगी का दहससा थीं। अली सरिार जाररी, रादजंिर दस
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