रविवार पन्ना SUNDAY 12 जुलाई 2026, ¹इंदौर कागज की दीवार पर रंग से िजंदगी! जावहद खान हरलली की तंग गहलयों में छोटा-सा कमरा है। कमरे में रंगों की खुशबू हजसकी उंगहलयों में अब भी ब्रश की थरथराहट बाकी है। यह किील अहमर अंसारी हैं, हजनहें लोग पेंटर किील कहते हैं।...
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रविवार पन्ना SUNDAY 12 जुलाई 2026, ¹इंदौर कागज की दीवार पर रंग से िजंदगी! जावहद खान हरलली की तंग गहलयों में छोटा-सा कमरा है। कमरे में रंगों की खुशबू हजसकी उंगहलयों में अब भी ब्रश की थरथराहट बाकी है। यह किील अहमर अंसारी हैं, हजनहें लोग पेंटर किील कहते हैं। उम्र करीब 70 साल, लेहकन हाथ आज भी ऐसा चलता है जैसे रीिार के कागज पर कोई लेखक कहानी नहीं, रंगों से हजंरगी हलख रहा हो। किील साहब हसि्फ पेंटर नहीं हैं। िे उस रौर के आहखरी गिाह हैं जब शहर की रीिारें बोलती थीं। जब हिलम का पोसटर छपता नहीं था, बनाया जाता था। जब हीरो की आंखों में गुससा मशीन नहीं ्लालती थी, पेंटर की कलाई ्लालती थी। जब हीरोइन का चेहरा हसि्फ चेहरा नहीं होता था, उसमें लाल, पीला, नीला, हरा सब हमलकर ऐसा जारू बनाते थे हक राह चलता इंसान भी रो हमनट रुक जाए। आज िही रुहनया फलेकस, हिनाइल और ह्लहजटल ह्रंहटंग के नीचे रब चुकी है। मगर किील अब भी ब्रश पकड़े बैठ़े हैं, जैसे कह रहे हों हक मशीन बाजार जीत सकती है, यार नहीं। किील उत्तर्ररेश के बरेली हजले के आंिला कसबे से आते हैं। उनके हपता का जनरल सटोर था और घर में कोई आट्ड सटूह्लयो या खानरानी पोस
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