रविवार पन्ना SUNDAY 02 जब 'सत्या', 'मकबूल', 'स्पर्श' जैसी फिलमें देखते हैं, तो समझ आतया है फक ्े सभी नयाटक के कलयाकयार हैं, जो ्पददे ्पर इतनया सच्या अफभन् कर गए हैं। फिलमी दुफन्या को सच्याई से रूबरू करवया्या है इन कलयाकयारों ने। आज तो फसनेमया फसि्फ ‘बॉकस-...
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रविवार पन्ना SUNDAY 02 जब 'सत्या', 'मकबूल', 'स्पर्श' जैसी फिलमें देखते हैं, तो समझ आतया है फक ्े सभी नयाटक के कलयाकयार हैं, जो ्पददे ्पर इतनया सच्या अफभन् कर गए हैं। फिलमी दुफन्या को सच्याई से रूबरू करवया्या है इन कलयाकयारों ने। आज तो फसनेमया फसि्फ ‘बॉकस- आफिस’ तक ही फसमट कर रह ग्या है। लोग ्ही ्पूछते हैं फिलम ने सौ करोड़ रवििार. 02 अगस्त, 2026| 06 कमयाए? ्फद हया,ं तो चलो देख लेते हैं। नवयाज उद्ीन (सिलतया फसि्फ ्पैसे की...!) अगस्त 2026, ¹¹·¤·¤·¤·¤·¤इंदौर महिलाएं करेंगी राज! पंकज त्रिपाठी का कहना है त्क पचास साल बाद मत्हलाएं दुत्नया चलाएंगी। यह मजाक लग सकती है, लेत्कन इसके पीछे पुरानी मदादानगी, जेन-जी की बेचैनी, मोबाइल वाले ररशते और बदलते समाज की पूरी कहानी है। पंकज वरिपाठी की बा्तों में अलग वकसम की खुरदरी सच्ाई है। बा्त कक कजस खुशी को लोग मोबाइल में ढूंढ रहे हैं, वहां कमलनी ही नहीं है। को चमका कर नहीं बोलते, सीधे रखते हैं। जैसे गांव का इंसान कहता है कक जेन-जी की सबसे बड़ी कदककत यह है कक बेचैन है। जीने से पहले बात इतनी ही है भाई, मानना है तो मानो, नहीं मानना है तो समय मनवा देगा। कदखना च
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