Eklavya snapshots
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Eklavya Snapshots Shalok जे न िमतर् दुःख होई दुखारी | ितिन्हहं िबलोकत पातक भारी | िनज दुःख िगिरसम रज किर जाना | िमतर्क दुःख-रज मेरु समाना | अथर्:- सच्चा िमतर् वही है जो िमतर् के दुःख में काम आता है| वह िमतर् के कण जैसे दुःख को भी मेरु के समान भारी मानकर... More

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